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Aaina-e-Amal

Har roz hum faisle lete hain, chahe wo Business,Love,Rule ke ho.Lekin kya in faislon mein humne kabhi socha ke Khuda ko humne kahan rakha? Yeh shayari wahi sawal chhooti hai jo humein apne andar jhaankhne par majboor karti hai. •┈┈┈┈┈┈┈┈┈┈┈┈┈┈┈┈┈┈⊰✺ तिज़ारत की तो, क्या ख़ुदा को रखा सारिफ़ और ख़ुद के बीच में? मोहब्बत की तो, क्या ख़ुदा को रखा महबूब और ख़ुद के बीच में? हुक़ूमत की तो, क्या ख़ुदा को रखा अवाम और ख़ुद के बीच में? कब तक यूँ नाकामी को  तक़दीर का लिबास पहनाते रहोगे? क्या कभी हर अमल को हलाल मक़सद बनाया तूने?                                           ~शहाब (साक)  •┈┈┈┈┈┈┈┈┈┈┈┈┈┈┈┈┈┈⊰✺